गांड सेक्स चाचा भतीजा कहानी में मैं पड़ोस की भाभी की चुदाई की नीयत से उन पर नजर रखता था. उनका लड़कियों जैसा बेटा मेरे से चिपका रहता था. मैं कैसे उसकी गांड मारी और उसने अपनी माँ के बारे में बताया.
दोस्तो, यह मेरी दूसरी कहानी है.
मेरी पहली कहानी थी
ताई की बेटी की चूत चोदकर बीवी बना लिया
आप लोगों ने यदि न पढ़ी हो, तो प्लीज जरूर पढ़ें.
मेरी सभी कहानियां खुद मेरे साथ हुई हैं, यह गांड सेक्स चाचा भतीजा कहानी भी एकदम सच पर आधारित है.
मेरे गांव की चचेरी भाभी के बेटे की गांड की चुदाई की कहानी में आप पढ़ेंगे कि कैसे मैंने भतीजे की गांड को चोदा था.
हमारे पड़ोस में रहने वाले भैया जी बाहर रहते हैं.
वे कभी कभी ही घर आते हैं मतलब वे महीने में एकाध बार ही आ पाते हैं.
मेरे भतीजे की उम्र 18 साल है. उसका बदन लड़कियों के जैसा है. मेरा भतीजा साला गांडू किस्म का है.
मैंने उसे चोदने के बाद अपने दोस्त से भी ठुकवा दिया था.
वह एकदम गोरे बदन का और लड़कियों के जैसे फूले दूध का है.
उसके नेचुरल लाल लाल होंठ देख कर किसी का भी मन उसके होंठों को चूसने का करेगा.
वह दरअसल है ही गांड मरवाने वाला आइटम, उसका लंड भी कुल 2 इंच का है.
अक्सर मैं उसकी मम्मी को नहाते देखता था और सोचता था कि किस तरह से भाभी की ले लूँ.
उस वक्त तक मेरा मेरे भतीजे से कुछ भी लगाव नहीं था और न ही मैं उसे चोदने के बारे में सोचता था.
मेरा भतीजा अपने दादा के साथ दुकान पर जाता था.
उसके साथ मेरा सेक्स किस तरह से हुआ, यह सुनें.
एक दिन हम दो दोस्त खटिया पर बैठे थे. तभी भतीजा आया और मेरी जांघ पर बैठ गया.
मेरे लंड में उसकी गांड का स्पर्श होने से धीरे धीरे मेरा लंड खड़ा होने लगा.
हालांकि वह छोटी उम्र से ही मेरे पास इसी तरह से आता था और मैं उस वक्त कुर्सी पर, या खटिया पर बैठा रहता था … तो वह मेरी जांघ पर या गोद में बैठ जाता था.
उस वक्त मेरे लंड में ज्यादा कुछ नहीं होता था, पर आज उसके यूं बैठ जाने से मुझे बड़ा कामुक सा लगा था और मैंने उसकी कमर में हाथ डाल कर उसे सहलाना चालू कर दिया था.
उसे भी अच्छा लग रहा था तो वह कुछ नहीं कह रहा था बल्कि मेरे लौड़े पर अपनी गांड को और ज्यादा घिसने लगा था.
तभी मेरे दोस्त को किसी का फोन आ गया और वह चला गया.
अब मुझे मौका मिल गया और मैंने सोचा कि आज इसकी गांड मारने की कोशिश करता हूँ.
जबकि मैं उसकी मम्मी को नंगी देखने के बहाने से उसके घर जाता तो भी वह मेरे पास आ जाता था.
पर तब मेरे मन में उसकी मम्मी की जवानी घुसी रहती थी तो मैं भतीजे को अपने ऊपर से हटाता रहता था और वह मेरे साथ मस्ती करता रहता था.
उसको मम्मी भी हॉट थी पर मैं उसकी मम्मी को अभी सैट नहीं कर पा रहा था.
खैर … उस दिन दोस्त के जाते ही मैंने उसे अपनी जांघ से सरका कर गोदी में बिठा लिया और उसके आगे हाथ करके उसके दूध सहलाने लगा.
वह गर्म होने लगा था और मेरे लंड पर अपनी गांड घिसने लगा था.
वो भी लंड पर सही से बैठ गया और अपनी कमर को हिला हिला कर मुझसे बात करने लगा. हम दोनों ही सेक्स में खो गए थे.
मैं उसे धीरे से किस करने लगा, उसकी गर्दन में अपनी गर्म सांसें छोड़ने लगा.
मैंने उससे पूछा- अच्छा लग रहा है न!
वह बोला- हां चाचा, बड़ा अच्छा लग रहा है!
मैंने उसे दूध के निप्पल को अपनी दो उंगलियों से पकड़ कर मींजा तो वह आह आह करके कराह उठा.
तब मैंने कहा- तेरे निप्पल बड़े मस्त हो गए हैं!
वह बोला- हां चाचा, मुझे भी बस अब यही लगता है कि कोई मेरे दूध दबाए और निप्पल मींजे!
उसके मुँह से इतना साफ सुनकर मैंने उसकी गांड में अपने लंड का दबाव बनाया और कहा- नीचे भी कुछ कुछ होता है क्या!
वह अपनी गांड को लौड़े पर रगड़ कर बोला- हां चाचा, बड़ा अच्छा लग रहा है!
मैंने कहा- और ज्यादा करवाएगा क्या?
वह बोला- मुझे क्या करना है?
मैंने कहा- जरा खुल कर मजा लेना है.
वह हंसा और बोला- खुल कर मजा … मतलब कैसा मजा?
मैंने उसकी नुन्नी पर हाथ फेरा, तो मुझे उसकी नुन्नी न के बराबर महसूस हुई.
मैंने अब उसकी गांड पर हाथ फेरा और कहा- बता न कपड़े खोल कर प्यार करूं?
वह चुप रहा, फिर वह पलट कर मेरी तरफ मुँह करके मेरी गोदी में बैठ गया और मेरे होंठों के पास अपने होंठ लाकर गर्म सांसें छोड़ने लगा.
मुझसे रहा न गया और मैंने उसके होंठ अपने होंठों में भर लिए.
वह भी बड़े आराम से मेरे होंठों से अपने होंठ चुसवाने लगा.
अब मामला बड़ा ही संगीन हो गया था.
मैंने उसके बदन से टी-शर्ट को ऊपर उठाई और उसके एक चूचे को अपने मुँह से भर कर चूसने लगा.
वह एकदम से मस्त हो गया और उसने अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ लिया.
मैं भी समझ गया कि लौंडा पक्का गांडू है.
मैंने झट से उसे अपने ऊपर से हटाया और कहा- चल दरवाजे बंद करके आ. तब तक मैं अपने कपड़े उतारता हूँ!
वह कपड़े उतारने की बात सुनकर एकदम से किलकारी मारता हुआ उठा और फट से दरवाजा बंद कर आया.
मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और उसके सामने अपना खड़ा लंड लहरा दिया.
वह लंड देख कर एकदम से खुश हो गया और अचानक से उसके मुँह से निकल गया कि यह तो दादा जी के लंड से भी बड़ा लंड है!
मैंने समझ लिया कि यह अपने दादा जी के लंड के साथ खेल चुका है.
मैंने कहा- अब जल्दी से चाचा के लंड को चूस ले मेरी जान!
वह फट से घुटने के बल बैठ गया और मेरे लंड को किसी पेशेवर रंडी की तरह चूसने लगा.
मैंने उसकी मम्मी के बारे में बात करनी शुरू कर दी- तेरी मम्मी भी बड़ी हॉट है … क्या वे भी दादा जी को देती हैं!
इस पर मेरा भतीजा बस हंस दिया.
मैंने कहा- चल अब घोड़ी बन जा!
वह किसी परफेक्ट गांडू की तरह हो गया और उसने अपनी गांड खोल कर मुझे दिखाना चालू कर दी.
मैंने देखा तो उसकी गांड फटी हुई थी.
तब मैंने लंड पर थूक लगाया और उसकी गांड के छेद में सुपारा टिका दिया.
वह बोला- चाचा धीरे पेलना … आपका बहुत मोटा और बड़ा है!
मैंने उसकी बात को सुन कर अनसुना किया और धीरे से अपने लंड के सुपारे को उसकी गांड के छेद में दबाना चालू कर दिया.
वह ‘आह आह.’ कर रहा था मगर हट नहीं रहा था.
मैंने कहा- तेल लगाऊं क्या?
वह बोला- नहीं, बस धीरे धीरे पेलो चाचा … थोड़ा दर्द होगा, लेकिन ले लूँगा.
अब मैंने जरा जोर देते हुए लंड के सुपारे को अन्दर ठांस दिया.
वह दबी हुई आवाज में कराह उठा- आई मर गए चाचा … धीरे धीरे पेलो न दर्द होता है!
मैंने उसकी चूचियों पर हाथ फेरा और वापस धक्का दिया तो लंड और अन्दर चला गया.
इसी तरह से कुछ देर बाद मैंने उसकी गांड में अपना पूरा लंड ठांस दिया और उसकी चुम्मी लेते हुए गांड चुदाई चालू कर दी.
कसम से लौड़े को मीठे भतीजे की गांड में घुस कर बड़ा ही सुख मिल रहा था.
गांड सेक्स चाचा भतीजा करते हुए अब मैंने उससे बात करना शुरू की- क्यों बे भोसड़ी के गांडू साले … कब से लंड ले रहा है … मादरचोद मुझे बताया तक नहीं वरना अब तक कब का पेल चुका होता!
वह हंसा और बोला- चाचा, आप बस मेरी मम्मी को ताड़ते रहते थे, इसलिए मुझे लगा कि आपका इन्टरेस्ट सिर्फ मम्मी में ही है!
मैंने उसकी मम्मी की बात सुनी तो कहा- हां भतीजे यह बात सच है कि मुझे तेरी मम्मी की चुत चोदने का मन था. इसीलिए उसे नंगी नहाते हुए देखने की कोशिश करता था.
वह हंसा और बोला- आप सीधे सीधे उन्हें पकड़ ही लो … वे थोड़ा बहुत नखरा करेंगी पर शायद मान जाएंगी!
मैंने उसकी गांड में जोर से स्ट्रोक देते हुए कहा- और कहीं न मानी तो?
वह बोला- थोड़ा रिस्क तो लेना ही पड़ेगा.
मैंने कहा- तू मेरा एक काम कर दे … बस उससे तेरी मम्मी मेरे लंड के नीचे आ जाएगी.
वह बोला- क्या?
मैंने कहा- एक दिन अपने मम्मी पापा की चुदाई की वीडियो बना कर दिखा!
वह बोला- पापा, मम्मी के ऊपर चढ़ते ही नहीं हैं!
मैंने चौंकते हुए कहा- फिर कौन चढ़ता है?
वह धीरे से बोला- सब काम दादा जी ही करते हैं!
यह सुनकर मुझे समझ में आ गया कि अब भाभी की चुदाई को कोई नहीं रोक सकता.
बस उस दिन मैंने भतीजे की गांड मारी और उसे अपना वीर्य पिला कर लंड साफ करवा लिया.
अब अगला छेद भाभी का ही होगा, यह सोचते हुए मैंने भतीजे को भगाया और बाथरूम में जाकर सिगरेट फूंकते हुए भाभी के यौवन को याद करने लगा.
दोस्तो, आपको मेरी गांड सेक्स चाचा भतीजा कहानी कैसी लगी, प्लीज मुझे बताएं.
अगली बार मैं आपको बताऊंगा कि मैंने किस तरह से भाभी को चोदा और उन्हीं के सामने उनके लड़के की भी गांड मारी.
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